Monday, 1 August 2016

Short Independence Day (Swatantra Diwas) Essay in Hindi

Posted by ADMIN
Hindi is the mother tongue of most of the Indians and so most of the students in the school get's homework to write Independence Day essay in Hindi language. When I was in my school, I loved doing this as my homework and the same thing I am going to share here on my blog.. This is going to be a short essay, I mean the one which is perfect for students and I am sure you will like this essay. This has been written in Hindi fonts - Devnagri fonts (and not in Hinglish) which makes 20x easier for children to cope it to their note books.
Currently we have only one essay on our website, but don't worry.. We will have more of them, and yes, very soon!



Now let's directly move on to the essay without wasting our time on chit-chat!

UPDATE: We have just fixed some grammatical errors in this essay of Swatantra Diwas and now it's even better! :D

Independence Day Essay in Hindi Fonts!!

स्वतन्त्रता दिवस 15 अगस्त, सन् 1947 के दिन अंग्रेजों ने भारत का शासन भारतीयों के हाथ सोंप दिया । इसी दिन भारत के हृदयसम्राद जो पं ० जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री" बन । इहाँ दिन सैकडों वर्षों की पराधीनता के उपरान्त भारत ने फिर से स्वतन्त्रता की साँस ली । इसलिए यह दिन भारतीयों के लिए त्योहार का महत्त्व रखता है ।
इस दिन सभी कार्यालय तथा करवाने, स्कूल तथा बा जार बन्द रहते हैं । प्रभात काल में ही दिल्ली में प्रधान-मद-त्री लाल किले से भाषण करके देश की दशा पर विचार करते हैं और भारत की स्वाधीनता के लिए प्राणों की आहुति देने वालों को श्रद्धांजलि जी भेंट करते हैं । इसी तरह प्रदेशों के राज्यपाल ( गवर्नर ) या मुर-त्-यमं-त्री- इस दिन को मनाना परम कर्तव्य समझते हैं ।
इस दिन को मनाने के लिए अनगिनत जनता सुन्दर-सुन्दर वस्त्र धारण किए उत्सव-थल की अंतर बडी जाती है । सबसे पूर्व भारत का रादृट्रीय गान "जन-गण-मन अधिनायक जय हे भारत भाग्य विधाता" गाया जाता है । इसके अनन्तर कविता- पाठ होता है और फिर भाषण । भाषण समाप्त होते ही जनता की भीड़ हर्ष उल्लास में घर की ओर लौटती है ।
धन्य है यह दिन जिस दिन भारतीयों ने भारत माता की बेढियाँ काटकर इसे बन्धन-मुक्त किया । आज हम स्वतन्त्र हैं, स्वतन्त्रता से साँस ले सकते  । हमारा अपना राष्ट्र०८वज है, अपना संविधान है, अपनी संसद है । आज" भऱरतीय अपना सिर ऊंचा करके चल सकता है । संयुक्त राष्ट्र संघ में ममारत का अपना स्थान और सम्मान है ।
15 अगस्त, 1947 ही वह दिन था, जब अंग्रेज हमारे देश का शासन हमें सौंपकर, सात समनंर्दर पार अपने देश को चले गए । अत: इस दिन को आस्था से मनाना हमारा कर्तव्य है ।


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You can obviously edit these essays for your requirement and even cut some lines in order to shorten this essay. We give you all the permissions for this, but you are not allowed to republished this on another website, at all.
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